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मिर्ची

प्रकार:  
प्राकृतिक फसलें
मिर्ची की फसल

मिर्च, कपास के बाद खरगौन जिले की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसल है। साल दर साल जिले में मिर्च की खेती का क्षेत्र और उत्पादन बढ़ रहा है। सबसे बड़ी मिर्च मंडियों मे से एक मिर्च मंडी यहां खरगौन जिले के बेड़िया में सनावद के पास स्थित है।

मिर्च भारत की प्रमुख मसाला फसल है। इसका उपयोग हरी एवं लाल दोनों अवस्थाओं में उपयोग किया जाता है। मिर्च में तीखापन इसमें पाये जाने अवयव कैप्सेसिन के कारण होता है मिर्च का उपयोग मसाला, चटनी, अचार एवं सॉस बनाने में किया जाता है। मिर्च से प्राप्त कैप्सेसिन एवं ओलियोरेसिन का उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जाता है। भारत विश्व में मिर्च का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता एवं निर्यातक देश है। किसान भाई मिर्च की खेती से औसतन 1 से 1.5 लाख रुपये प्रति एकर शुद्ध लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

जलवायु – मिर्च की खेती के लिये आर्द्र उष्ण जलवायु उपयुक्त होती है। फल परिपक्वता अवस्था में शुष्क जलवायु आवश्यक होती है। ग्रीष्म ऋतु में अधिक तापमान से फल व फूल झड़ते हैं रात्रि तापमान 16 से 21 डिग्री सेल्सियम फल बनने के लिये उपयुक्त है। मिर्च की खेती के लिये 15 – 35 डिग्री सेल्सियस तापमान तथा गर्म आर्द जलवायु की आवश्यकता होती है।

मृदा – मिर्च की खेती सभी प्रकार की भूमियों में की जा सकती है परंतु अच्छे जल निकास वाली एवं कार्बनिक बलुई दोमट, मध्यम काली दोमट मिट्टी जिसका पीएच मान 6.5 से 7.5 हो मिर्च की खेती के लिये सबसे उपयुक्त है। ऐसी मृदायें जिनमे जल निकास की समुचित व्यवस्था नहीं होती, मिर्च की खेती के लिये अनुपयुक्त होती हैं।

मिर्च की उन्नत किस्में: काशी अनमोल, अर्का सुफल, अर्का लोहित, पूसा ज्वाला आदि

मिर्च की संकर किस्में: काशी अर्ली, काशी सुर्ख, अर्का मेघना, अर्का स्वेता, अर्का हरिता का चयन करें।

निजी कंपनियों द्वारा विकसित मिर्च की संकर किस्में: नवतेज, माही 456, माही 453, सोनल, एचपीएच-12, रोशनी, शक्ति 51 आदि संकर किस्मों की खेती किसानों द्वारा की जा रही है। किसान भाई ऐसी किस्मों का चुनाव करें जो स्थानीय वातावरण में अनुकूल हों एवं बाजार में उनकी माँग हों।