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(भूतपूर्व - पश्चिम निमाड़)
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(Formerly known as - West Nimar)अहिल्या घाट, महेश्वर

जिले का परिचय

इतिहास     भूगोल व नदियां     पहुंच     प्रशासनिक-भाग     खनिज व फसलें     उद्योग व शैक्षणिक सुविधाएं     पड़ोसी-जिले

     (1) इतिहास

 

इतिहासकारों के मतानुसार नर्मदा घाटी की सभ्यता अत्यंत प्राचीन है। रामायणकाल, महाभारतकाल, सातवाहन, कनिष्क, अभिरोहर्ष, चालुक्य, भोज, होलकर, सिंधिया, मुगल तथा ब्रिटिश आदि से यह क्षेत्र जुड़ा हुआ है। विभिन्न कालों में यहां जैन, यदुवंशी, सिद्धपंथी, नागपंथी आदि का प्रभाव रहा है। प्राचीन स्थापत्य कला के अवशेष इस क्षेत्र के ऐतिहासिक गाथाओं को व्यक्त करने में आज भी सक्षम हैं। इस क्षेत्र में प्राप्त पाषाणकालीन शस्त्रों से भी यह सिद्ध होता है। ऐसा अनुमान है कि आर्य एवं अनार्य सभ्यताओं की मिश्रित भूमि होने के कारण यह क्षेत्र "निमार्य" नाम से जाना जाने लगा जो कि कालांतर में अपभृं हो कर "निमार" एवं फिर "निमाड़" में परिवर्तित हो गया। (निमा = आधा) । एक अन्य मतानुसार यह नाम नीम के वृक्षों के कारण पड़ा।

 

भारत के उत्तर व दक्षिण प्रदेशों को जोड़ने वाले प्राकृतिक मार्ग पर बसा यह क्षेत्र सदैव ही महत्वपूर्ण रहा है। इतिहास के विभिन्न कालखण्डों मे यह क्षेत्र - महेश्वर के हैहय, मालवा के परमार असीरगढ़ के अहीर, माण्डू के मुस्लिम शासक, मुगल तथा पेशवा व अन्य मराठा सरदारों - होल्कर, शिंदे, पवार - के साम्राज्य का हिस्सा रहा है। 1 नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश राज्य के गठन के साथ ही यह जिला "पश्चिम निमाड़" के रूप में अस्तित्व में आ गया था। कालांतर में प्रशासनिक आवश्याकताओं के कारण दिनांक 25 मई 1998 को "पश्चिम निमाड़" को दो जिलों - खरगौन एवं बड़वानी में विभाजित किया गया।

                                                                                    
(2) भूगोल व नदियां

खरगौन जिला मध्यप्रदेश की दक्षिणी पश्चिमी सीमा पर स्थित है। 21 अंश 22 मिनिट - 22 अंश 35 मिनिट (उत्तर) अक्षांश से 74 अंश 25 मिनिट - 76 अंश 14 मिनिट (पूर्व) देशांश के बीच यह जिला फैला है। इसका क्षेत्रफल लगभग 8030 वर्ग कि.मी. है। इस जिले के उत्तर में धार, इंदौर व देवास, दक्षिण में महाराष्ट्र, पूर्व में खण्डवा, बुरहानपुर तथा पश्चिम में बड़वानी है। नर्मदा घाटी के लगभग मध्य भाग में स्थित इस जिले के उत्तर में विंध्याचल एवं दक्षिण में सतपुड़ा पर्वतश्रेणियां हैं। नर्मदा नदी जिले में लगभग 50 कि.मी. बहती है। कुंदा तथा वेदा अन्य प्रमुख नदियां हैं। देजला-देवड़ा, गढ़ी गलतार, अंबकनाला तथा अपर वेदा प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं हैं। महेश्वर पनबिजली तथा सिंचाई योजना नर्मदा पर बनी तीन प्रमुख पनबिजली व सिंचाई योजनाओं में से एक है।

 

खरगौन जिला मुख्यालय के अक्षांश व देशांश क्रमशः 21°49'18" (उत्तर) तथा 75°37'10" (पूर्व) हैं। यह शहर औसत समुद्र सतह से लगभग 283 मीटर (± 9 मीटर) की ऊंचाई पर है।

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(3) पहुंच

 

यह जिला इंदौर, खण्डवा, बड़वानी, धार, झाबुआ, धुळै (धूलिया), जळगाव (जलगांव) से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा है। आगरा - मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 इस जिले से गुज़रता है। जिले के पूर्वी भाग से मीटर गेज रेल्वे मार्ग जाता है जो कि दिल्ली - जयपुर - इंदौर - खण्डवा - हैदराबाद मार्ग है। इस रेल्वे मार्ग पर महत्वपूर्ण स्टेशन बड़वाह एवं सनावद हैं। खण्डवा ब्रॉड गेज का सबसे पास का स्टेशन तथा इंदौर सबसे पास का हवाई अड्डा है। 

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(4) फ्रशासनिक-भाग

प्रशासनिक दृष्टि से जिले को 5 अनुविभाग, 9 तहसील, 9 जनपद पंचायत (विकासखण्ड) तथा 1407 राजस्व ग्रामों में बांटा गया है। यह जिला एक आदिवासी जिला है जिसमें 600 ग्राम पंचायतें,  3 नगर पालिकाएं, 4 नगर पंचायतें तथा 7 कृषि उपज मण्डियां हैं। जिले के 2 मुख्यालय हैं - प्रशासन, पुलिस व अन्य सभी शासकीय कार्यालयों के लिये खरगौन तथा न्यायिक व्यवस्था के लिये मण्डलेश्वर। खरगौन, कसरावद, भीकनगांव, बड़वाह, सनावद, मण्डलेश्वर तथा महेश्वर जिले के प्रमुख नगर हैं।

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(5) खनिज व फसलें

 

ग्रेनाइट, कैल्साइट, क्वार्ट्झाइट, चूना पत्थर, ब्रेक्सिया, रेतीलापत्थत आदि जिले में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज हैं। ज्वार व मक्का खरीफ़ की तथा गेहूं रबी की प्रमुख फसलें हैं। कपास तथा मूंगफली प्रमुख व्यावसायिक फसलें हैं।

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(6) उद्योग व शैक्षणिक सुविधाएं

 

जिले में लगभग 13779 छोटे तथा 14 मध्यम व बड़े उद्योग हैं। खरगौन, निमरानी, बड़वाह, पाडली तथा भीकनगांव में औद्योगिक क्षेत्र हैं। जिले मे 3 अभियांत्रिकी महाविद्यालय, 2 पोलीटेक्निक महाविद्यालय तथा कई स्नातकोत्तर व स्नातक स्तर के महाविद्यालय एवं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हैं।

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(7) पड़ोसी-जिले

 

  • बड़वानी - खरगौन से 90 कि.मी. दूर राज्य महामार्ग क्रमांक 27 (खण्डवा - खरगौन - बड़वानी - कुक्षी - वडोदरा गुजरात) पर बड़वानी जिला मुख्यालय बसा हुआ है।

    • बावनगजा - बड़वानी से 10 कि.मी. दूर एक अत्यंत प्रसिध्द जैन तीर्थस्थल।

  • बुरहानपुर - खरगौन से 130 कि.मी. दूर बसा यह शहर पहले "दक्षिण का द्वार" कहलाता था। दिल्ली - मुंबई रेलमार्ग पर स्थित है।

    • असीरगढ़ - यह किला खरगौन से 100 कि.मी. इंदौर - बुरहानपुर मार्ग पर है। इसे "दक्षिण की कुंजी" नाम से जाना जाता था।

  • देवास - खरगौन से 150 कि.मी. दूर। बैंक नोट प्रेस तथा कई प्रसिद्ध औद्योगिक संस्थान ब कारखाने यहां हैं। रेल्वे स्टेशन है।

  • धार - यह शहर खरगौन से 130 कि.मी. दूरी पर स्थित है।

    • माण्डू (माण्डवगढ़) - खरगौन से लगभग 120 कि.मी. दूर अत्यंत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल।

  • इंदौर - यह शहर खरगौन से 143 कि.मी. दूर है। इंदौर को मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी भी कहा जाता है। यहां रेल्वे जंक्शन एवं हवाई अड्डा है।

  • खण्डवा - खरगौन से 90 कि.मी. है। रेल्वे जंक्शन है। दिल्ली - मुंबई ब्रॉड गेज रेलमार्ग तथा दिल्ली - जयपुर - हैदराबाद मीटर गेज रेलमार्ग यहां से गुजरते हैं।

    • ऊँकारेश्वर - यह स्थान खरगौन से 90 कि.मी. दूर नर्मदा नदी के किनारे पर बसा है। भगवान शिव के  12  ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग - श्री ममलेश्वर यहां स्थित है।

  • उज्जैन - खरगौन से 195 कि.मी. दूर यह शहर भगवान शिव के  12  ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग - श्री महाकालेश्वर के लिये प्रसिद्ध है। पर्यटन स्थल एवं रेल्वे जंक्शन है।

  • जळगाव (जलगांव) एवं धुळै (धूलिया) - महाराष्ट्र के ये जिले खरगौन के पड़ौसी जिले है।

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